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जानिये क्या है Yahoo के बिकने की असली वजह ? Microsoft ने भी की थी कोशिश

आपने याहू (Yahoo) का नाम जरूर सुना होगा | आज से 15 -16 साल पहले याहू इन्टरनेट का दूसरा नाम हुआ करता था | हो सकता है की आपने अपना पहला ईमेल अकाउंट भी याहू पर ही बनाया हो |

याहू ka चैट रूम (Chat Room) और मैसेंजर (Messenger) कभी दुनिया के सबसे बड़े सोशल प्लेटफार्म हुआ करता था | एक समय था जब अधिकतर लोगो का पसंदीदा सर्च इंजन याहू हुआ करता था |

पर अब ऐसा नहीं है | याहू बस यादो का एक हिस्सा बन कर रह गया है | खुद को समय के साथ ना बदल पाने के कारण याहू आज खुद को सस्ते दामो में बेचने को तैयार करना पड रहा है |

अब सवाल ये उठता है की याहू के इस हालात की असली वजह क्या है ?

अंग्रेजी में एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है “A JACK OF ALL TRADES BUT MASTER OF NONE ” जिसका मतलब है “एक ऐसा व्यक्ति जिसे आता तो सब है पर माहिर किसी में नहीं है |” याहू के लिए ये कहावत बिलकुल सही साबित होती है |

1994 में याहू की स्थापना की गयी थी और कुछ ही सालो में याहू एक कामयाब कंपनी बन गयी थी | एक साथ कई काम करके इस कंपनी ने नाम तो काम लिया लेकिन किसी भी काम में अपनी योग्यता साबित नहीं कर पायी | Yahoo Mail, Yahoo cricket , Yahoo  news , flickr , Yahoo  answers ,  Yahoo Mobile और ऐसी ही ना जाने कितनी सारी सेवाएं दे कर याहू ने एक समय इन्टरनेट पर अपनी वो जगह बना ली थी जहा पर आज गूगल है |

एक समय था जब 2003 में याहू ने गूगल (Google) को 3 करोड़ में खरीदने का ऑफर दिया था | पर गूगल ने 5 करोड़ मांगे जिसके वजह से उन्होंने गूगल को खरीदने से मना कर दिया |

फिर 2006 में भी याहू के पास फेसबुक (Facebook) को खरीदने का सुनहरा मौका था | पर उस समय याहू ने फेसबुक की असली ताकत को नहीं पहचाना |

और आज के हालात ये है की (Yahoo) याहू वेरिज़ोन (Verison) के हाथो मात्र 32,000 करोड़ रूपए बिकने के बाद गूगल और फेसबुक के सामने एक छोटी से कंपनी बन कर रह गयी है | एक समय इन्टरनेट पर राज करने वाली कमपनी आज अपने ही अस्तित्व का मोहताज बन कर रह गयी है |

माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने भी की थी याहू को खरीदने की कोशिश

ऐसा नहीं है की वेरिज़ोन (Verison) पहली कंपनी थी जिसने याहू को खरीदने की कोशिश की | इससे पहले 2008 में माइक्रोसॉफ्ट ने याहू की 44 बिलियन डॉलर में खरीदने का प्रस्ताव रखा था | पर याहू ने उस समय मना कर दिया |

याहू के पतन का मुख्य कारण : कुशल नेतृत्व की कमी

याहो के पतन का एक मुख्य कारण याहू में कुशल नेतृत्व की कमी को भी माना जा रहा है| आपको बता दे की पिछले 12 सालो में कंपनी में 7 सीईओ (CEO) बदले जा चुके है जिनमे से याहू के वर्तमान सीईओ (CEO) मारिसस मायेर (Marissa Mayer ) को माना जा रहा है |

yahoo downfall effect on marissa mayer
Photo Credit : Respective Owner

Marissa Mayer के कार्य काल में याहू को 2015 में 30 ,000 करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ | पर आप को ये जान कर हैरानी होगी की कंपनी के नुक्सान की सजा Marissa Mayer को नहीं मिल रही और ना ही उनकी सैलरी पर इस नुक्सान का कोई ख़ास फर्क पड़ता है |

आमतौर पर कंपनी के सीईओ की सैलरी कंपनी के परफॉरमेंस पर निर्भर करती है परंतु Marissa Mayer की सैलरी का सिर्फ ३ फ़ीसदी हिस्सा ही कमपनी की परफॉरमेंस पर निर्भर है | जिसका मतलब है की कंपनी के नुक्सान का Marissa की जेब पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा |

एक कहावत है जो आपने दिमाग को नहीं बदल सकता वो कुछ भी नहीं बदल सकता | याहू के पतन से हमें यही सीखने को मिलता है | हमें समय के साथ बदलना चाहिए वरना इतिहास बन कर रह जाएंगे |

 

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