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जानिए क्या है भारत के इन्टरनेट का सच ?

क्या आप का भी सामना गतिहीन इन्टरनेट से होता है?

भारत में आम लोगो के लिए इन्टरनेट सेवाएं 15 अगस्त 1995 चालू की गए थी तब इन्टरनेट की स्पीड 9.6kbps थी पर आप को ये जान कर अफ़सोस जरूर होगा तब से लेकर आज तक इन्टरनेट की स्पीड उस जादुई स्पीड से नहीं बढ़ी जिस जादुई स्पीड से इन्टरनेट भेचने वाले कंपनियों की मुनाफे बढे है|

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  1.  भारत  की इन्टरनेट की एवरेज स्पीड 3.5mbps है जिस हिसाब से भारत की ग्लोबल रैंक114 है|
  2. भारत में पीक कनेक्शन स्पीड 25mbps है ये आप को ज्यादा लग रहा होगा फिर भी भारत पीक कनेक्श स्पीड में 104 नंबर पर है।
  3.  श्रीलंका , मलेशिया ,इंडोनेशिया , वियतनाम जैसे देश भी इंटनेट स्पीड के मामले में भारत  से आगे है
  4. भारत के  70% लोग आज भी 2G सेवाओ पर निर्भर है|
  5.  टेलीकॉम कंपनियो को ज्यादा कमाई 3G और 4G सुविधा देने पर होती है इसीलिए ये टेलीकॉम कंपनिया आप पे जोर देती है की 3G और 4G डाटा ही खरीदे।

स्लो स्पीड से बचने के लिये कई लोग ब्रॉडबैण्ड सेवाओ का सहारा लेते है अगर विकसित देशो से तुलना करे तो आप पाएंगे की भारत में ब्रॉडबैंड नाम की कोई चीज़ ही नहीं है|

अमेरिका में ब्रॉडबैंड इन्टरनेट के लिए 25mbps का बेंचमार्क रखा गया है जबकि भारत में 512kbps ब्रॉडबैंड का बेंचमार्क माना जाता है । इस हिसाब से भारत के लोगो को अमेरिका के मुकाबले 50 गुना कम स्पीड मिल रहा है। और वो भी ब्रॉडबैंड के नाम पर|

आप समझ गए होंगे किस तरह टेलिकॉम कंपनिया सिर्फ मार्केटिंग के दम पर बिना स्पीड के 3G, 4G, और ब्रॉडबैंड सेवाएं बेचने की कोशिस कर रही है। मेरा मानना है की अगर हमारे पास बेहतर इन्टरनेट स्पीड नहीं होगा तो भारत भी उस बेहतर स्पीड से विकसित नहीं हो पायेगा जिस स्पीड से होना चाहिए|

इतने महंगे इंटनेट कनेक्शन ले कर भी हमे बस दीखता है तो वो है लोड हटा हुआ icon इन्टरनेट के नाम पर हमारे साथ हर पल हर सेकंड धोखा हो रहा है हमे चुप नहीं बैठना चाहिए हमे इसके लिए मिलजुल के आवाज उठानी चाहिए|

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